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Thursday, October 29, 2020

राजस्थान सरकार का बड़ा फ़ैसला , कक्षा 9वीं से 12वीं के छात्रों की फ़ीस में 40% की कटौती

 



राजस्थान सरकार के नए फैसले के मुताबिक छात्र अब उतनी ही फीस देंगे, जितनी उनकी पढ़ाई होगी. अभिभावकों को बड़ी राहत देते हुए राजस्थान सरकार की गठित कमेटी ने नौंवी से लेकर 12वीं तक के छात्रों की फीस में 40 फीसदी की कटौती की है. कमेटी ने तर्क दिया है कि सीबीएसई ने सिलेबस में 30 फीसदी कटौती करने के बाद छात्रों की फीस 30 प्रतिशत कम की है. वहीं राजस्थान बोर्ड ने 40 प्रतिशत सिलेबस कम किए हैं इसलिए 40 प्रतिशत फीस कम की जा रही है.


वहीं निजी स्कूलों के एसोसिएशन वाली कमेटी प्रोग्रेसिव एसोसिएशन स्कूल ऑफ राजस्थान ने कहा है कि यह फैसला सही नहीं है. हमलोग राज्य सरकार के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे.


दरअसल कोरोना के समय में स्कूल बंद थे. बंद स्कूल के दौरान फीस की वसूली को लेकर कमेटी गठित की गई थी जिसने अपनी रिपोर्ट दी है.


फिलहाल नौवीं से बारहवीं तक के स्कूल खुल रहे हैं इसलिए इनकी फीस को लेकर फैसला लिया गया है माना जा रहा है कि नवंबर महीने से इन क्लास के छात्रों की पढ़ाई शुरू हो जाएगी. राज्य सरकार ने फिलहाल एक से लेकर आठवीं तक के छात्रों के लिए स्कूल खोलने पर कोई फैसला नहीं लिया है.



इसलिए इन क्लासों की फीस का निर्धारण बाद में किया जाएगा. कमेटी ने यह भी तय किया है कि छात्रों से पिछले सत्र के आधार पर ही फीस ली जाएगी. 2020-21 के लिए किसी भी तरह की यूनिफॉर्म में बदलाव नहीं होगा. ट्यूशन फीस के अलावा लैब, स्पोर्ट्स और लाइब्रेरी या अन्य सभी सुविधा शुल्क के नाम पर पिछले दरवाजे से फीस नहीं बढ़ाई जा सकेगी.


अभिभावकों को मासिक या त्रैमासिक फीस भरने की छूट होगी. निजी स्कूलों के सामने फीस वसूलने के लिए यह शर्त है कि वह अपने कर्मचारियों और शिक्षकों को निर्धारित वेतन देंगे और कोविड-19 किसी भी कर्मचारी की छटनी नहीं करेंगे.


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कमेटी ने ऑनलाइन पढ़ाई के लिए भी फीस तय कर दी है. स्कूल ऑफलाइन पढ़ाई के साथ-साथ ऑनलाइन पढ़ाई भी करते रहेंगे और ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले छात्रों को 60 फीसदी तक शुल्क देना पड़ेगा



यूं समझें फीस का गणित


पिछले सत्र के आधार पर फीस तय होगी।


सत्र 2020-21 में यूनिफार्म नहीं बदलेगी।


अभिभावक द्वारा दी गई ट्यूशन फीस या कैपेसिटी बिल्डिंग शुल्क की रसीद देनी होगी। इसमें कटौती का उल्लेख करना होगा।


लैब, स्पोर्ट्स, लाइब्रेरी का उपयोग नहीं होने से इनका शुल्क नहीं लिया जा सकेगा।


विद्यार्थी बाल वाहिनी का उपयोग करता है तो परिवहन शुल्क ले सकेंगे। जो पिछले सत्र से अधिक नहीं होगा। यह स्कूल खुलने पर शेष कार्यदिवसों के अनुपात में तय होगा।


पिछले सत्र 2019-20 का बकाया शुल्क भी अभिभावक मासिक किश्तों में दे सकेंगे।


किसी भी विद्यार्थी को बोर्ड पंजीयन के लिए रोका नहीं जा सकेगा। भले ही उसने ऑनलाइन कक्षाएं अटेंड नहीं की हों।


यदि किसी छात्र ने फीस का भुगतान नहीं किया है तो टीसी नहीं काटी जा सकेगी।


निजी स्कूलों को फीस वसूलने के लिए यह शर्त होगी कि वह कार्मिकों और शिक्षकों को निर्धारित वेतन का भुगतान करेगा। कोविड के कारण किसी की छंटनी नहीं होगी।



सरकार ने कहा, ऑनलाइन पढ़ाई के लिए 60% तक शुल्क ले सकते हैं
स्कूलों में चल रही ऑनलाइन पढाई का शुल्क लिया जा सकेगा। इस शुल्क का नाम कैपेसिटी बिल्डिंग शुल्क रखा गया है। यह शुल्क किसी कक्षा के लिए निर्धारित शुल्क का 60 फीसदी होगा। स्कूल को ऑनलाइन पढ़ाई नहीं करने वाले विद्यार्थियों का भी सिलेबस पूरा कराना होगा। ऑनलाइन कक्षा नहीं लेने की स्थिति में कैपेसिटी बिल्डिंग शुल्क नहीं लिया जा सकेगा।